Posted on 28 February, 2007 by अतुल शर्मा
आज शनिवार है और उन्होंने सुबह सुबह उनके दरवाजे पर आए ‘शनि महाराज’ अर्थात् शनि का दान लेने वाले हृष्ट-पुष्ट व्यक्ति को कटोरी भर तेल और कुछ सिक्कों का दान किया। यह काम वे हर शनिवार को नियम से करते हैं, कभी भूलते नहीं। आज भी ऑफ़िस के लिए निकलते समय ‘कालू’ के लिए घी [...]
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Posted on 28 February, 2007 by अतुल शर्मा
तांत्रिक को फिर कोई मंत्र सिद्ध करना था। पहले इस काम के लिए महाराज विक्रम ने उसकी मदद की थी। विक्रम ने उसे वेताल लाकर दिया था। वेताल विक्रम के कंधे से चौबीस बार उतर कर वापस पेड़ पर जा लटका था और पच्चीसवीं बार में विक्रम उसे पकड़ कर लाया था। हर बार अर्थात् [...]
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