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	<title>Comments on: घुघूती बासूतीजी के प्रश्नों के उत्तर</title>
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	<description>सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दु:ख भाग्भवेत्।।</description>
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		<title>By: अतुल शर्मा</title>
		<link>http://malwa.wordpress.com/2007/03/19/qa/#comment-65</link>
		<dc:creator>अतुल शर्मा</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Mar 2007 06:54:53 +0000</pubDate>
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		<description>रवि भैया, आपने जो जानकारी दी उससे मेरी जिज्ञासा शांत हुई। आपको धन्यवाद। 
आपने और सृजन शिल्पीजी ने यहीं टिप्पणी में ही जानकारी दे दी, अच्छा है। क्योंकि मैंने अंत में यही लिखा है कि मैं किसी को टैग नहीं कर रहा। ये प्रश्न केवल मेरी उत्सुकता थी जो मैंने इस माध्यम से जानना चाही। मैंने यहाँ आपके और सृजन शिल्पीजी के केवल नामों का ही उल्लेख किया, कोई मेल नहीं भेजी, यह सोच कर कि यदि आप लोग यह पोस्ट देख लेते है तो मुझे उत्तर मिल ही जाएँगे अन्यथा कोई बात नहीं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>रवि भैया, आपने जो जानकारी दी उससे मेरी जिज्ञासा शांत हुई। आपको धन्यवाद।<br />
आपने और सृजन शिल्पीजी ने यहीं टिप्पणी में ही जानकारी दे दी, अच्छा है। क्योंकि मैंने अंत में यही लिखा है कि मैं किसी को टैग नहीं कर रहा। ये प्रश्न केवल मेरी उत्सुकता थी जो मैंने इस माध्यम से जानना चाही। मैंने यहाँ आपके और सृजन शिल्पीजी के केवल नामों का ही उल्लेख किया, कोई मेल नहीं भेजी, यह सोच कर कि यदि आप लोग यह पोस्ट देख लेते है तो मुझे उत्तर मिल ही जाएँगे अन्यथा कोई बात नहीं।</p>
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		<title>By: अतुल शर्मा</title>
		<link>http://malwa.wordpress.com/2007/03/19/qa/#comment-64</link>
		<dc:creator>अतुल शर्मा</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Mar 2007 06:34:44 +0000</pubDate>
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		<description>सृजन शिल्पीज‍ी, आपका धन्यवाद। आपकी पोस्ट्स मैं पढ़ता रहा हूँ और आगे भी पढ़ूँगा, तो पहले प्रश्न का उत्तर भी मिल जाएगा।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सृजन शिल्पीज‍ी, आपका धन्यवाद। आपकी पोस्ट्स मैं पढ़ता रहा हूँ और आगे भी पढ़ूँगा, तो पहले प्रश्न का उत्तर भी मिल जाएगा।</p>
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		<title>By: सृजन शिल्पी</title>
		<link>http://malwa.wordpress.com/2007/03/19/qa/#comment-63</link>
		<dc:creator>सृजन शिल्पी</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Mar 2007 06:02:34 +0000</pubDate>
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		<description>अतुल जी, आपके दूसरे प्रश्न का उत्तर मैं अभी दिए देता हूँ। नेताजी के संबंध में मेरी लेख-शृंखला पाठकों की जिज्ञासाओं और प्रतिक्रियाओं के आधार पर ही आगे बढ़ पाएगी। इसमें कितने लेख होंगे और कब तक यह जारी रहेगी, कह नहीं सकता। पाठक ही उसकी दिशा और गति को तय करेंगे। नेताजी की मृत्यु संबंधी रहस्य पर जितनी जानकारी अनुज धर की किताब, जो हिन्दी में अगले माह तक प्रकाशित हो जाएगी,  में समेटी जा चुकी है, मैं उसके बाद के नवीनतम तथ्यों पर फोकस कर रहा हूँ। लेकिन मेरा उद्देश्य नेताजी के विचारों, संघर्षों और उनके जीवन के उन अज्ञात पहलुओं पर प्रकाश डालना है, जो भारत में एक बड़े बदलाव का माध्यम बन सकता है। उन लेखों का संकलन यदि किताब के रूप में लाया जाना उपयुक्त लगेगा तो सोचा जाएगा। फिलहाल तो यह कड़ी आगे बढ़ानी है। 

पहले प्रश्न का उत्तर थोड़ा विश्लेषण की मांग की करता है। बेहतर होगा कि किसी पोस्ट में आगे कभी मैं इस विषय पर विस्तार से लिखूं। हालांकि इसके संबंध में पहले भी मैं प्रसंगानुसार लिखता रहा हूँ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अतुल जी, आपके दूसरे प्रश्न का उत्तर मैं अभी दिए देता हूँ। नेताजी के संबंध में मेरी लेख-शृंखला पाठकों की जिज्ञासाओं और प्रतिक्रियाओं के आधार पर ही आगे बढ़ पाएगी। इसमें कितने लेख होंगे और कब तक यह जारी रहेगी, कह नहीं सकता। पाठक ही उसकी दिशा और गति को तय करेंगे। नेताजी की मृत्यु संबंधी रहस्य पर जितनी जानकारी अनुज धर की किताब, जो हिन्दी में अगले माह तक प्रकाशित हो जाएगी,  में समेटी जा चुकी है, मैं उसके बाद के नवीनतम तथ्यों पर फोकस कर रहा हूँ। लेकिन मेरा उद्देश्य नेताजी के विचारों, संघर्षों और उनके जीवन के उन अज्ञात पहलुओं पर प्रकाश डालना है, जो भारत में एक बड़े बदलाव का माध्यम बन सकता है। उन लेखों का संकलन यदि किताब के रूप में लाया जाना उपयुक्त लगेगा तो सोचा जाएगा। फिलहाल तो यह कड़ी आगे बढ़ानी है। </p>
<p>पहले प्रश्न का उत्तर थोड़ा विश्लेषण की मांग की करता है। बेहतर होगा कि किसी पोस्ट में आगे कभी मैं इस विषय पर विस्तार से लिखूं। हालांकि इसके संबंध में पहले भी मैं प्रसंगानुसार लिखता रहा हूँ।</p>
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		<title>By: रवि</title>
		<link>http://malwa.wordpress.com/2007/03/19/qa/#comment-62</link>
		<dc:creator>रवि</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Mar 2007 05:17:58 +0000</pubDate>
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		<description>अतुल भाई, मैं चूंकि पहले ही टैगियाया जा चुका हूँ, अतः सोचा कि आपके प्रश्नों का उत्तर यहीं दे दूं.

मैं इलेक्ट्रिकल क्षेत्र से ही था, और कम्प्यूटर मुझे सदैव आकर्षिक करता था. 1988 में कम्प्यूटर पर काम करने का पहला मौका मिला, तब डॉस और वर्डस्टार तथा लोटस ही थे. उसी समय शब्द रत्न नाम का तथा बाद में अक्षर नाम का डॉस आधारित हिन्दी वर्ड प्रोसेसर आया उस पर अपनी रचनाएं लिखता था. विद्यूत मंडल में भी व्यक्तिगत तौर पर पहले पहल कंप्यूटर का इस्तेमाल किया था.
इसी सिलसिले की कुछ मनोरंजक कहानी यहाँ देखें -
http://hindini.com/fursatiya/?p=167
तथा कुछ यहाँ पर
http://hindini.com/fursatiya/?p=166</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अतुल भाई, मैं चूंकि पहले ही टैगियाया जा चुका हूँ, अतः सोचा कि आपके प्रश्नों का उत्तर यहीं दे दूं.</p>
<p>मैं इलेक्ट्रिकल क्षेत्र से ही था, और कम्प्यूटर मुझे सदैव आकर्षिक करता था. 1988 में कम्प्यूटर पर काम करने का पहला मौका मिला, तब डॉस और वर्डस्टार तथा लोटस ही थे. उसी समय शब्द रत्न नाम का तथा बाद में अक्षर नाम का डॉस आधारित हिन्दी वर्ड प्रोसेसर आया उस पर अपनी रचनाएं लिखता था. विद्यूत मंडल में भी व्यक्तिगत तौर पर पहले पहल कंप्यूटर का इस्तेमाल किया था.<br />
इसी सिलसिले की कुछ मनोरंजक कहानी यहाँ देखें -<br />
<a href="http://hindini.com/fursatiya/?p=167" rel="nofollow">http://hindini.com/fursatiya/?p=167</a><br />
तथा कुछ यहाँ पर<br />
<a href="http://hindini.com/fursatiya/?p=166" rel="nofollow">http://hindini.com/fursatiya/?p=166</a></p>
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		<title>By: Shrish</title>
		<link>http://malwa.wordpress.com/2007/03/19/qa/#comment-61</link>
		<dc:creator>Shrish</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Mar 2007 22:07:23 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://malwa.wordpress.com/2007/03/19/qa/#comment-61</guid>
		<description>भैया  पहले तो मैं घबरा गया कि कहीं फिर से टैगिंग का खेल तो शुरु नहीं हो गया, बड़ी मुश्किल से निपटे थे। खैर देर आयद दुरुस्त आयद।

रविरतलामी जी से जो प्रश्न आपने पूछा वो मेरे मन में भी कई बार आया है कि इलैक्ट्रिक इंजीनियरिंग के क्षेत्र से होने के बावजूद उन्हें कंप्यूटिंग का इतना अच्छा ज्ञान कैसे हुआ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भैया  पहले तो मैं घबरा गया कि कहीं फिर से टैगिंग का खेल तो शुरु नहीं हो गया, बड़ी मुश्किल से निपटे थे। खैर देर आयद दुरुस्त आयद।</p>
<p>रविरतलामी जी से जो प्रश्न आपने पूछा वो मेरे मन में भी कई बार आया है कि इलैक्ट्रिक इंजीनियरिंग के क्षेत्र से होने के बावजूद उन्हें कंप्यूटिंग का इतना अच्छा ज्ञान कैसे हुआ।</p>
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