चिट्ठाजगत का ‍फ़िल्मोत्सव

कल ऑफ़िस से घर जाते समय कुछ सोच विचार चल रहा था। विचार तो मस्तिष्क में हमेशा ही चलते रहते हैं, एक क्षण के लिए भी रुकते नहीं हैं। जब हम सो जाते हैं तो हमारा अवचेतन कुछ न कुछ जुगाली करता रहता है। ऐसे अचानक दिमाग में यह बात कौंधी कि यदि चिट्ठा जगत [...]