चिठ्ठाकारी का एक साल

कल इस चिट्ठे को एक वर्ष पूरा हो गया। समय की कमी के कारण इस पोस्ट कल नहीं लिख सका  इसलिए ‍चिट्ठे के जन्मदिन के दूसरे दिन मैं यह पोस्ट डाल रहा हूँ। ठीक एक साल पहले 6 जून 2006 को पहली पोस्ट लिखी थी और देखते ही देखते एक साल गुजर गया पता ही [...]

जरा सोचिए, क्या मिल जाएगा हमें

धुरविरोधीजी आपने सही लिखा है फिर भी यहाँ चीखने चिल्लाने से न तो मोदी का कुछ होना है, न चन्द्रमोहन का, न एम.एफ़: हुसेन का और ना ही आप जिन्हें समझा रहे हैं उन्हें कुछ असर होना है। गुजरात के नाम से चिल्लाने वाले क्या नहीं जानते हैं कि हिन्दी भाषी राज्यों की क्या हालत [...]

बाज़ार की बयार

[इस आलेख को लिखने वाले स्वयं को सीटीवादक कहलाना पसंद करते हैं। यहाँ ये इसी नाम से आलेख देना चाहते हैं। अब सीटीवादक नाम क्यों, ये तो वे स्वयं ही अपने शब्दों में कभी बताएँगे तो मैं और आप भी जानेंगे, परंतु मैंने इस सीटी बजाने का कुछ अंदाज लगाया है। देश के नेता जो [...]

केवल एक दिन महिलाओं के लिए?

8 मई महिला दिवस है। विकसित कहे जाने वाले देश और समाज जैसे इंग्लैंड या अमेरिका में भी महिलाओं के साथ हिंसक घटनाएँ उनके पति या परिवार वालों के द्वारा ही होती रहतीं हैं। भारत में ‍इसकी जितनी ख़बरें छपतीं या प्रसारित होतीं हैं उससे कहीं अधिक नेपथ्य में रह जातीं हैं। पुराने जमाने में [...]