अथ श्वानगाथा: Dogma of Dogs

कुत्ते इस बात पर नाराज हो ही गए कि उनके नाम को मनुष्य जब-तब जहाँ-तहाँ घसीटता रहता है। आखिर कब तक यह सब सहते रहेंगे। कोई तो सीमा होनी चाहिए। अब तो चिट्ठाजगत में भी उनके नाम का दुरुपयोग हो रहा है और यह सब ‘कौवों के राजा’ अर्थात काकेश का किया धरा है। मोहल्ले [...]

चिट्ठाजगत का ‍फ़िल्मोत्सव

कल ऑफ़िस से घर जाते समय कुछ सोच विचार चल रहा था। विचार तो मस्तिष्क में हमेशा ही चलते रहते हैं, एक क्षण के लिए भी रुकते नहीं हैं। जब हम सो जाते हैं तो हमारा अवचेतन कुछ न कुछ जुगाली करता रहता है। ऐसे अचानक दिमाग में यह बात कौंधी कि यदि चिट्ठा जगत [...]