Posted on 27 October, 2007 by अतुल शर्मा
पवनपुत्र हनुमान बड़े ही चिंतित दिखाई दे रहे थे। उनकी भावभंगिमा से वे किसी उहापोह में लगते थे। आकुल-व्याकुल से वे अपने प्रभु श्रीराम के पास पहुँचे तो उन्हें ऐसे बदहवास देख कर भगवान राम भी घबरा उठे।
प्रभु बोले, ‘हनुमान ये क्या दशा हो गई तुम्हारी? लोग अपनी चिन्ताओं, दु:खों के निवारण के लिए तुम्हारे [...]
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Posted on 25 April, 2007 by अतुल शर्मा
कुत्ते इस बात पर नाराज हो ही गए कि उनके नाम को मनुष्य जब-तब जहाँ-तहाँ घसीटता रहता है। आखिर कब तक यह सब सहते रहेंगे। कोई तो सीमा होनी चाहिए। अब तो चिट्ठाजगत में भी उनके नाम का दुरुपयोग हो रहा है और यह सब ‘कौवों के राजा’ अर्थात काकेश का किया धरा है। मोहल्ले [...]
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Posted on 28 February, 2007 by अतुल शर्मा
तांत्रिक को फिर कोई मंत्र सिद्ध करना था। पहले इस काम के लिए महाराज विक्रम ने उसकी मदद की थी। विक्रम ने उसे वेताल लाकर दिया था। वेताल विक्रम के कंधे से चौबीस बार उतर कर वापस पेड़ पर जा लटका था और पच्चीसवीं बार में विक्रम उसे पकड़ कर लाया था। हर बार अर्थात् [...]
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