मुशर्रफ मंशा: श्रीनगर पर पाक झंडा

बेनजीर भुट्टो ने अपनी आत्मकथा ‘डाटर ऑफ़ ईस्ट’ में जोड़े गए नए अध्याय में खुलासा किया है कि परवेश मुशर्रफ ने 1996 में उनसे श्रीनगर पर नियंत्रण कर वहाँ पाकिस्तानी झंडा फहराने की अनुमति माँगी थी। एक पाकिस्तानी साप्ताहिक पत्रिका ने भुट्टो की आत्मकथा के कुछ अंश प्रकाशित किए हैं जिसमें बताया गया कि यदि बेनजीर आदेश दें तो मुशर्रफ श्रीनगर पर पा‍किस्तान का नियंत्रण होगा। बेनजीर के कथनानुसार उन्होंने इसकी इजाज़त नहीं दी। समाचार यहाँ से लिया गया है।
पता नहीं भारतीय गु्प्तचर तंत्र को इसकी जानकारी थी भी या नहीं। हो सकता है जानकारी हो परंतु सामरिक कारणों से इसे उजागर नहीं किया गया हो। वैसे आशंका यही है कि भारतीय तंत्र इस षडयंत्र के बारे में बेख़बर चैंन की बंसी बजा रहा हो क्यों‍कि तीन साल बाद 1999 में इसी मुशर्रफ ने कारगिल पर हमला किया था। अभी इस आत्मकथा के बाज़ार में आने की कोई ख़बर नहीं है। फिर भी जब कभी यह आती है तो भारत के लोगों की सामान्य प्रतिक्रिया यह होगी कि पाकिस्तान विरोधी नारे लगाए जाएँगे, कुछ रैलियाँ-जुलूस वगैरह निकाले जाएँगे और पुतला दहन भी रखा जा सकता है। कुछ दिनों तक यह तमाश चलेगा, मीडिया इस मुद्दे को भुनाएगा और सब शांत हो जाएगा। जनता फिर साह-बहू के सीरियल में निमग्न हो जाएगी। हमारे इसी चरित्र के कारण आज नहीं तो कल निश्चित रूप से ऐसा हो सकता है कि मुशर्रफ नहीं तो कोई और पाकिस्तानी शासक श्रीनगर पर पाकिस्तानी झंडा फहरा दे।